Tuesday, December 16, 2008

राज नेता बनाम जनतंत्र

मुंबई आतंकवादी घटना के पश्चात इन राज नेताओं का जिस प्रकार सम्पूर्ण राष्ट्र में एक साथ विरोध हुआ ओर उसे जनतंत्र के विरोध के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया वह दुखद है जब कि चुनावों में भाग ले कर जनता ने स्पष्ट संदेश दे दिया कि यहाँ की जनता को जन तंत्र में तो विश्वास है परन्तु इन भ्रस्ट एवं अपराधी प्रवृति के नेताओं में विश्वास नही है, यदि इन लोगों का आचरण नही बदलता है तो कहीं ऐसा न हो कि यह मौखिक और प्रदर्शनात्मक विरोध हिंसक विरोध में बदल जाए, उस स्थिति में उनके सुरक्छा गार्ड भी उनकी सुरक्छा ना करके जनता का ही साथ देंगे क्यों कि वे भी इनके अन्याय से व्यथित हैं इस स्थिति को बचाना है तो जनता को अधिकार देना होगा कि वहा अपने गुस्से को बैलेट पर उतार सके, इसके लिए बैलेट में एक और खाना बनाना ही होगा 'इनमें से कोई नही' और यदि इस खाने में ३०% से अधिक मत पड़ जायें तो सभी प्रत्याशियों को अगले ६ वर्स तक के लिए किसी भी चुनाव के अयोग्य घोषित कर दिया जाय और चुनाव में धन का प्रयोग कम से कम हो चुनाव जीतने वाले नेताओं की सम्पति की सूछ्म जांच हो, उनके विशेष अधिकार और लूट के अवसर समाप्त करें और उनके सुरक्छा गार्ड मुक्त करें

2 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

सही सुझाव है।

surendra said...
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