Wednesday, December 31, 2008

वाणी की स्वतंत्रता

सर्व प्रथम सभी को नव वर्ष की शुभकामनाएं, किसी भी बात की स्वतन्त्रता का तात्पर्य किसी दूसरे को कष्ट पहुचाना कदापि नही है परन्तु इन माननीय जनप्रतिनिधियों को कौन समझाए की उनकी असयंत वाणी से न केवल इस राष्ट्र की जनता दिग्भ्रमित होती है अपितु किसी का चरित्र हनन भी होता है और इन की विश्वसनीयता भी समाप्त होती है २००८ इसी प्रकार की बातों के लिए भी स्मरण किया जायेगा, दिल्ली की मुख्मंत्री शीला दिक्सित का यह कहना की 'लड़कियों को अधिक रोमांचकारी नही होना चाहिए' ,राज ठाकरे का उत्तर भारतियों के प्रति लगातार विष वमन करना, भीम सिंह द्बारा मुफ्ती मोहम्मद सईद पर अक्छरधाम के आतंकियों को सन्रक्छन देने का आरोप लगाना, अंतुले और अमर सिंह द्बारा आतंकियों के विरुद्ध संघर्स करते हुए वीर सहीदों की सहादत पर शंका करना, दिग्विजय सिंह और श्रीप्रकाश जैसवाल द्वारा आतंकवादियों द्बारा फिरौती की मांग के विषय में बोल कर सम्पूर्ण राष्ट्र को दिग्भ्रमित करने का प्रयास करना और इसी प्रकार भारतीय जनता पार्टी के नकवी द्वारा शहीदों को श्रद्धांजली देने वाली बहनों के लिए अभद्र टिप्पडी करना, विनय कटियार द्बारा यह कहना की मुंबई के आतंकी एक कांग्रेसी नेता के यहाँ ठहरे थे, आदि अनेक घाव है जो ये माननीय निरंतर देते रहते हैं, क्या इनकी इस वाणी पर संयम लगाने का कोई तरीका नही है यदि अनर्गल प्रलाप तीन प्रकार के लोग करते है तो उसका प्रभाव किसी पर नही पड़ता है , १- अबोध बच्चा (जो ये हैं नहीं), २- पागल(दिमागी रूप से), ३- सनकी या मानसिक विच्छिप्त ये लोग इनमें से किस श्रेणी में आते है, और यदि इनमें से कुछ हैं तो क्या इन्हें जनप्रतिनिधि होना चाहिए

2 comments:

समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...

मजा आ गया
आप को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ...

नीरज गोस्वामी said...

आप को नव वर्ष की शुभकामनाएं....
नीरज